रुद्रपुर:-जवाहरलाल नेहरू जिला अस्पताल का राजकीय मेडिकल कॉलेज में विलय होने के बाद जहां सभी अधिकार छीन लिए गए है। वहीं हालात यह है कि सामान्य तौर पर प्रतिदिन हजारों मरीजों की ओपीडी होती है और 10 डॉक्टरों का तबादला होने के बाद अभी तक उनके स्थान पर किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन कैसे मरीजों का उपचार करेगा और कैसे चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालेगा।
बताते चले कि जनवरी 2026 में जिला अस्पताल को राजकीय मेडिकल कॉलेज में विलय होने का आदेश आता है और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक के सभी अधिकार छीन लिये जाते है। अभी स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू भी नहीं हुई थी कि 30 जून को पीएमएस/वरिष्ठ फिजिशियन सहित दस डॉक्टरों के तबादले हो जाते है। जिनके स्थान पर अभी तक नये डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई और अभी कुछ दिन शायद नहीं होने की संभावना भी है। अब प्रतिदिन ओपीडी की बात कहे। तो प्रतिदिन 850 से अधिक और सोमवार व मंगलवार को 1100 से 1200 के करीब ओपीडी होती है। इसके अलावा पोस्टमार्टम ड्यूटी,वीआईपी ड्यूटी,आपातकालीन कक्ष ड्यूटी सहित विभागीय मीटिंग का दायित्व भी डॉक्टर निभाते है। हालात यह है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में तबादला होने से पहले एक फिजिशियन,एक ऑर्थो डॉक्टर,दो बाल रोग,पांच स्त्री रोग विशेषज्ञ,दो एनेस्थेसियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट,एक ईएनटी,एक सर्जन था। तबादला होने के बाद एक बाल रोग विशेषज्ञ,एक स्त्री रोग वि शेषज्ञ ही बचे है। अब सवाल यह उठता है कि तबादला हुए डॉक्टर के स्थान पर नई तैनाती होने में यदि कुछ समय लगा। तो राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती है, क्योकि मरीजों की भारी संख्या के हिसाब से पहले भी चिकित्सकों की कमी थी और अब तबादला होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन कैसे स्थिति को संभालेगा। यह आने वाला समय ही बताएं गा।
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Spread the loveरुद्रपुर। -हर व्यक्ति यही चाहता है कि वह दिन-रात ड्यूटी करता है और जब उसे थोडा आराम का समय मिले और थोड़ा आराम करने का स्थान साफ सुथरा…
