रुद्रपुर। रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा के एक कथित बयान को लेकर मुस्लिम समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। मामले में विधायक पर मुस्लिम समाज के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं और विरोध में ज्ञापन भी दिया गया है।
अब सवाल अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम की चुप्पी को लेकर उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब रुद्रपुर में मुस्लिम समाज के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लग रहा है, तब अल्पसंख्यक समाज की आवाज उठाने की जिम्मेदारी रखने वाले पद पर बैठी उपाध्यक्ष की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने क्यों नहीं आई?
सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि फरजाना बेगम जसपुर से भाजपा की दावेदारी कर रही हैं, तो जसपुर के मुस्लिम मतदाता उनसे क्या उम्मीद करें?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अपने ही क्षेत्र रुद्रपुर में मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दे पर आवाज नहीं उठाई गई, तो जसपुर के मुसलमानों के हितों और उनकी समस्याओं को लेकर उनसे क्या अपेक्षा की जा सकती है?
मुस्लिम समाज का सवाल साफ है—क्या अल्पसंख्यक आयोग की जिम्मेदारी सिर्फ पद तक सीमित है या फिर अल्पसंख्यकों के सम्मान और अधिकारों के लिए निष्पक्ष होकर आवाज उठाना भी जिम्मेदारी है?
अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम अपनी चुप्पी तोड़ती हैं या नहीं।


