रुद्रपुर :-भारत सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं को लागू करने के खिलाफ श्रमिक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर विरोध जुलूस निकाला गया। जो शहर के मुख्य मार्गो से होता हुआ गांधी पार्क पर आकर समाप्त हुआ। श्रमिक नेताओं ने आह्वान किया कि सरकार का यह निर्णय श्रमिकों को गुलामी की ओर अग्रसर करता है। जिसका श्रमिक हड़ताल कर विरोध करें। तभी सरकार संहिता को रद्द कर सकती है। विरोध जुलूस में कई श्रमिक संगठनों ने भी हिस्सा लिया।
वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लागू चार श्रम संहिता मजदूर वर्ग को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने वाला कानून है। जिसके बाद मजदूरों को कब वेतनमान पर ज्यादा घंटे काम करना पडेगा। इसके अलावा उद्योगों में स्थाई होने के नियम को समाप्त करके फिक्स्ड टर्म एम्लॉयमेंट का नियम लागू कर दिया है। लोकतांत्रिक देश में मजदूर संघर्ष नहीं कर स कता है। केंद्र सरकार ने ट्रेड यूनियनों को नियंत्रित करने और श्रमिकों को कमजोर करते हुए चार श्रम संहिता लागू की है। जिसके बाद नोटिफाइड लेबर कोड, ड्राफ्ट नियम, सामूहिक सौदेबाजी को खत्म करने, हड़ताल का अधिकार छीनने, लगभग 70 प्रतिशत फैक्ट्रियों को लेबर कानून के दायरे, रेगुलेशन और मालिकों की जिम्मेदारियों से बाहर करने, मजदूरों को मालिकों की दया पर छोड़ने, ज्यादातर मजदूरों को ऑक्यूपेशनल सेफ्टी और सोशल सिक्योरिटी की सुरक्षा से बाहर कर दिया है। उन्ळोंने श्रमिक संगठनों से फैक्ट्रियों में हडताल कर हक हकूक की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। इस मौके पर मोर्चा के महासचिव मुकुल कुमार, कैलाश भट्ट, ललित मटियाली, बल्ली सिंह चीमा, अवतार सिंह, सुरेन्द्र कुमार, शिवदेव सिंह, रविन्द्र कौर, जगतार सिंह बाजवा, गंगाधर नौटियाल, अनिता अन्ना, जगदेव सिंह, रीता कश्यप, ममता पानू आदि मौजूद रहे।




