ऊधमसिंह नगर में गांव गश्त अभियान शुरू एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने किया उद्घाटन
एसएसपी ने खुद ही मॉनिटिरंग करने का लिया निर्णय
रुद्रपुर। एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने गांव गश्त अभियान की शुरूआत की है। जिसके चलते बीट कर्मचारी थाना-चौकी प्रभारी के साथ तीन दिन और पुलिस अधीक्षक व सीओ स्तर के अधिकारी एक दिन गांव में बिताकर बेहतर पुलिसिंग बनाने की कोशिश करेंगे। जिनका उद्देश्य आपराधिक एवं आर्थिक गतिविधियों की रोकथाम रहेगा।
बताते चलें कि कई दशकों पहले जब पुलिस के पास कोई आधुनिक एवं यातायात के साधन नहीं होते थे। उस वक्त पुलिस पार्टी माह में दो बार देहांत गश्त अभियान चलाती थी। जिसमें पहले संबंधित कोतवाली या थाना प्रभारी पुलिस पार्टी के साथ साइकिल, तांगा या फिर घुड़सवारी का सहारा लेकर दूरदराज गांव की ओर कूच करते थे और गांव में दिन-रात बिताकर जब वापिस आते थे तो पुलिस पार्टी को तीन दिन का समय लगता था। देहांत गश्त का एक ही उद्देश्य था कि डकैतों की सुरागरसी, मुखबिरों को तैयार करना और गांव में अपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने। मगर जैसे जैसे समय बीतता गया और आधुनिक पुलिसिंग शुरू हुई तो पुलिस का मुखबिर एवं सूचना तंत्र भी फेल होता चला गया। जारी गाइड-लाइन के अनुसार जिले के संबंधित थाना एवं चौकी प्रभारी अपने अपने बीट कर्मचारियों के साथ माह में तीन बार दूरदराज गांव में गश्त पर रहेगा और चौबीस घंटे का समय बीताने के बाद ही कोतवाली-चौकी की वापिसी होगी। इसके बाद इलाके के एसपी और सीओ भी माह में एक बार दूरदराज गांव में कैप करेंगे और गांव के लोगों से आपसी समाजस्य बनाकर सत्यापन अभियान, हाईवे किनारे अवैध रू से संचालित अपराधिक एवं आर्थिक गतिविधियों की निगरानी के लिए सूचना तंत्र मजबूत करेंगे। इसके लिए एसएसपी ने खुद ही मॉनिटिरंग करने का निर्णय लिया है।
बताते चलें कि कई दशकों पहले जब पुलिस के पास कोई आधुनिक एवं यातायात के साधन नहीं होते थे। उस वक्त पुलिस पार्टी माह में दो बार देहांत गश्त अभियान चलाती थी। जिसमें पहले संबंधित कोतवाली या थाना प्रभारी पुलिस पार्टी के साथ साइकिल, तांगा या फिर घुड़सवारी का सहारा लेकर दूरदराज गांव की ओर कूच करते थे और गांव में दिन-रात बिताकर जब वापिस आते थे तो पुलिस पार्टी को तीन दिन का समय लगता था। देहांत गश्त का एक ही उद्देश्य था कि डकैतों की सुरागरसी, मुखबिरों को तैयार करना और गांव में अपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने। मगर जैसे जैसे समय बीतता गया और आधुनिक पुलिसिंग शुरू हुई तो पुलिस का मुखबिर एवं सूचना तंत्र भी फेल होता चला गया। जारी गाइड-लाइन के अनुसार जिले के संबंधित थाना एवं चौकी प्रभारी अपने अपने बीट कर्मचारियों के साथ माह में तीन बार दूरदराज गांव में गश्त पर रहेगा और चौबीस घंटे का समय बीताने के बाद ही कोतवाली-चौकी की वापिसी होगी। इसके बाद इलाके के एसपी और सीओ भी माह में एक बार दूरदराज गांव में कैप करेंगे और गांव के लोगों से आपसी समाजस्य बनाकर सत्यापन अभियान, हाईवे किनारे अवैध रू से संचालित अपराधिक एवं आर्थिक गतिविधियों की निगरानी के लिए सूचना तंत्र मजबूत करेंगे। इसके लिए एसएसपी ने खुद ही मॉनिटिरंग करने का निर्णय लिया है।




