खटीमा। तराई बीज विकास निगम के परिसर में कुमाऊं सांस्कृतिक उत्थान मंच द्वारा आयोजित छह दिवसीय ऐतिहासिक उत्तरायणी कौतिक मेले का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आज समापन हो गया। अंतिम दिन स्थानीय युवा कलाकारों, लोक कलाकारों, विभिन्न विद्यालयों के बच्चों तथा विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने पारंपरिक वेशभूषा में रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर समा बांधा तथा दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं कार्यक्रम के समापन दिवस पर तमाम प्रतिनिधियों, अतिथियों तथा श्रद्धालुओं के साथ ही काफी भीड़ देखने को मिली, जहां बुजुर्गों, युवा कलाकारों तथा महिलाओं ने जमकर लुत्फ उठाया। मेले में कुमाँऊनी लोकगीत व लोकनृत्य के साथ ही विभिन्न वर्गों के लोक नृत्य, लोक गीत तथा पारम्परिक वेशभूषा के साथ ही सांस्कृतिक छटा भी देखने को मिली। वहीं कुमाऊं सांस्कृतिक उत्थान मंच के अध्यक्ष ठाकुर सिंह खाती तथा कोषाध्यक्ष बीएस मेहता ने समस्त क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कृतियों, धरोहरों, विरासत और परम्परा को आने वाली पीढ़ियों और जन जन तक पहुंचाने के लिए साथ ही विभिन्न वर्गों व धर्मों के लोगों को एकजुट करने के लिए विगत कई वर्षों से कुमांऊ सांस्कृतिक उत्थान मंच द्वारा उत्तरायणी कौतिक मेले का आयोजन किया जा रहा है। जिसका आज विधिवत समापन दिवस है। उन्होंने कहा कि मेले के आयोजन से आपसी भाईचारा और सौहार्द बढ़ता है तथा अपनी संस्कृतियों को संजोने के लिए हम सब को आगे आना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तरायणी पर्व धार्मिकता के साथ ही सांस्कृतिक महत्व भी रखता है यह मेला लोगों को आपस में जोड़ता है। इस दौरान भाजपा जिला सचिव अंजू देवी, विमला बिष्ट, जानकी गोस्वामी, अनीता ज्याला, प्रेमा महर, शांति पांडे, आशा जोशी, साधना विश्वकर्मा ,मंजू पाल, भागीरथी कापडी, लीला चंद, इंद्रा चंद्र, कमला मलकानी, कल्पना चंद, सुधांशु, उषा, रेनू उपाध्याय, कमला गोस्वामी, सावित्री चंद, सावित्री कन्याल तथा विमला धामी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।




