जोशीमठ। अभूतपूर्व आपदा के बीच एक और चिंतित करने वाली बात सामने आई है कि जोशीमठ जैसी दरारें कर्णप्रयाग तक पहुँच चुकी हैं। हाइवे कई जगह बैठा हुआ है तो वहीं कर्णप्रयाग के कुछ होटल और भवनों में भी दरारें देखने को मिल रही हैं। इधर स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया है और ऐसे भवनों का चिन्हीकरण किया जा रहा है।भू-धंसाव में ढहा मकान
जोशीमठ बचाओ एनटीपीसी हटाओ अभियान को लेकर स्थानीय निवासी पिछले 14 दिनों से तहसील परिसर में धरना दे रहे हैं उनका कहना है कि धामी सरकार केवल गुमराह कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर उन लोगों का एक ही बयान है कि यह कोई दैवीय आपदा नहीं बल्कि मानव जनित आपदा है जो कि टीबीसी मशीन के फंसे होने , बेतरतीब निर्माण और हाइड्रो प्रोजेक्ट को लगाने से हुई है। उनका साफ कहना है सरकार समय रहते रोक लगा देती तो यह इस मुकाम तक नहीं पहुंचता।भू-धंसाव में दरकीं दीवारें
लगातार दरारें और मकान खिसकने की घटनाओं को देखते हुए फिलहाल सरकार ने हेलंग ,मारवाड़ी बायपास,चारधाम आल वेदर रोड और एनटीपीसी की परियोजना से संबंधित सभी कार्य रोक दिए गए हैं। इसके अलावा इन परियोजनाओं का विरोध भी लगातार किया जाता रहा है।भू-धंसाव
रविवार को पीएमओ ने इस पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक ली है जिसमें एनडीआरएफ भी शामिल रही। फिलहाल इस बैठक पर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होना बताया जा रहा है शीघ्र ही कोई बड़ा फैसला आ सकता है।
60 परिवार विस्थापित किये जा चुके हैं, होटल,स्कूल में प्रभावित लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है। यह संख्या अभी 500 से 600 के बीच जा सकती है। भूगर्भ वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के अनुसार आगे के कदम उठाए जाएंगे। एनटीपीसी की टीबीसी मशीन के टनल में फंसे होने जैसी कोई जानकारी मुझे नहीं है। स्थायी विस्थापन के लिए भूगर्भीय वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आने के बाद कुछ चिन्हित जगहों को राज्य सरकार के अनुसार आवंटित किया जा सकता है। वहीं प्रभावित परिवारों को छह माह तक चार हजार रुपये किराया देना राज्य सरकार की ओर से आदेशित हुआ है जिसकी सूची तैयार करवाई जा रही है। – हिमांशु खुराना, डीएम चमोली।




