रुद्रपुर। भू-सम्पदा की बकाया राशि तीन करोड़ अस्सी लाख रुपये जमा न करने पर तहसील प्रशासन ने सामिया इण्टरनेशनल बिल्डर्स को नीलामी नोटिस जारी किया हैं। नोटिस ने अनुसार ग्राम दानपुर तहसील रुद्रपुर के खाता खतौनी संख्या 00826, खसरा 385 मि- कुल रकवा 3-0194 है- शेष रकवा 2-8236 है- मध्ये 0-812 है- भूमि की निलामी सात जून को होगी। बताते चलें कि काशीपुर हाईवे स्थित सामिया लेक सिटी के स्वामी जमील ए खान और निदेशक सगीर अहमद खान पर लाखो की ठगी करने का केस दर्ज हुआ था। इसके बाद से ही ग्रुप के खिलाफ शिकायती पत्रें के आने का सिलसिला रफ्रतार पकड़ गया। जहां एक ओर एसएसपी के आदेश पर एसआईटी ने अपनी तफ्रतीश को तेज कर दिया था। वहीं राजस्व वसूली विभाग ने भी सामिया ग्रुप पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया। जिसके चलते भू-संपदा देय के बाकीदार सामिया इंटरनेशनल बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड ग्राम दानपुर तहसील रुद्रपुर के ऊपर देय धनराशि तीन करोड़ अस्सी लाख रुपये जमा करने का नोटिस जारी किया। बकाया जमा न करने पर दो बार नीलामी की तारीख तय की गई, पर नीलामी प्रक्रिया में बोलीदाताओं की पर्याप्त मौजूदगी नहीं होने के कारण नीलामी प्रक्रिया की तिथि को आगे बढ़ा दिया गया है। अब तहसीलदार प्रशासन ने एक बार फिर नीलामी की तिथि सात जून तय की है।
काशीपुर हाईवे स्थित सामिया बिल्डर्स ग्रुप की ठगी के शिकार कोई एक धर्म या तबका नहीं, ऐसा कोई विभागीय कर्मचारी व अधिकारी नहीं है। जिसको ग्रुप ने प्लाट, मकान और दुकान के नाम पर ठगा न हो। ठगी के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद पुलिस ने कई तहरीरों पर रिपोर्ट दर्ज की। इसके अलावा 60 से अधिक ठगी के शिकार लोगों ने रेरा कोर्ट में याचिका डालकर न्याय की गुहार लगाई, जिसमें सभी लोगों के करीब 2-50 करोड़ से अधिक की ठगी की गई है। सामिया ग्रुप की ठगी के शिकार में सभी धर्मों के अलावा पीएसी कर्मी, एक दर्जन पुलिसकर्मियों, शिक्षक, सेवानिवृत फौजी सहित कई कारोबारी भी शामिल हैं। पिछले दस सालों से सामिया ग्रुप कार्यालय के चक्कर काट रहे ठगी के शिकार लोगों में एक आस जगी है कि शायद सामिया की संपत्ति नीलाम कर पीड़ितों को मिल सके। पीड़ितों के पैरोकार ने बताया कि सामिया में अनगिनत लोगों के साथ करोड़ों की ठगी हो चुकी है। कई सालों से पीड़ित जब ग्रुप के चक्कर काटकर थक गए तब जाकर किसी ने रेरा कोर्ट तो किसी ने पुलिस को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। मगर जिस प्रकार पुलिस का कसता शिकंजा और रेरा कोर्ट के निर्णय के बाद पीड़ितों को उम्मीद है कि उनका डूबा पैसा वापस हो सकता है।




