रुद्रपुर :-कभी एक दौर था कि तब तराई वन प्रभाग से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर हरियाली और कई किलोमीटर तक फैले घने जंगलों का विहंगम दृश्य देखने को मिलता था,लेकिन अतिक्र मण और विकास का रास्ता खुलते-खुलते जंगलों का दायरा घटता चला गया। जिसकी रोकथाम के लिए वन विभाग ने वन संरक्षण की कवायद भी शुरू कर दी है।
बताते चले कि वर्ष 1995 में नैनीताल जिले से ऊधमसिंह नगर को अलग किया था और पूर्वी और पश्चिमी तराई वन प्रभाग का नाम दिया गया। अगर तराई केंद्रीय वन प्रभाग के आंकड़ों की बात करे। तो उस दौर में वन विभाग की 41.168 हेक्टेयर के करीब भूमि दर्ज थी,लेकिन बुनियादी विकास का बढ़ता दायरा और अतिक्रमण के कारण तराई भावर के जंगलों का क्षेत्रफल घटता चला गया और करीब 30 से 73 हेक्टेयर भूमि के प्रस्तावों के कारण अभी कई चौकाने वाले बदलाव भी देखे जा सकते है। वर्ष 2025 की जमीनी हकीकत देखे। तो सघन हरित क्षेत्रफल में तीन से चार हजार हेक्टेयर तक की वास्तविक कमी सामने आई है और अब सरकारी अभियानों के माध्यम से री स्टोर की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। जिसको लेकर तराई वन प्रभाग ने शासन को पत्राचार कर ऐसे जंगली इलाके को अतिक्रमण मुक्त और अति जरुरी विकास कार्यो को ही कराने की कवायद शुरु कर दी है। ताकि जंगलों के घटते अस्तित्व को बचाया जा सके।
रुद्रपुर। माना जा रहा है कि जिस प्रकार प्रदेश सरकार द्वारा जंगलों को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चला रखा है। वैसे ही तराई वन विभाग के पत्राचार के बाद स्वीकृति प्रदान कर सकती है। जिसके बाद अतिक्रमण पर कड़ा प्रहार,भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई,तकनीकी निगरानी सहित कई कड़े नियमों का कड़ाई से पालन करवा सकती है।

