रुद्रपुर, भगवानपुर कुलड़िया में 46 कब्जा धारकों के आशियाने पर हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई वास्तव में हृदयविदारक रही। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई प्रारंभ होते ही चिह्नित ग्रामीणों के आंखों में आंसू, चेहरे पर मायूसी और बेबसी देखने को मिली। रोने-बिलखने के सिवा ग्रामीणों के पास कुछ नहीं था। कोई डिवाइडर पर बैठकर आशियाने को टूटता हुआ देखता तो कोई पुलिस से ईट देने की गुहार लगाता। आखिरकार विवश होकर पास ही बने छठ घाट पर लोगों ने शरण लेनी शुरू कर दी। कार्रवाई कुछ भी हो, लेकिन ग्रामीणों के दर्द को सुनकर हर कोई सिहर उठा। शनिवार की सुबह 8 बजे जब पुलिस की गाड़ियां, जेसीबी मशीन की गड़गड़ाहट और लाठी-डंडों, दंगा नियंत्रण वाहन और सशस्त्र बल भगवानपुर कुलड़िया गांव पहुंचा। तब घोषित किए गए अतिक्रमणकारियों के आंखों में आंसू छलकने लगे। पुलिस ने लोगों को घरों में घुसकर बाहर निकाला। इस दौरान कोई अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर डिवाइडर पर बैठ गया तो कोई सामान एकत्रित करने में जुट गया। वहीं कई कब्जा धारक पुलिस के सामने हाथ जोड़कर अपना दुख दर्द बयां करते रहे, लेकिन कहीं न कहीं पुलिस बल भी मजबूर दिखा और आदेशों का पालन करने का हवाला देते हुए 9 बजे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। जेसीबी ने जब कच्चे-पक्के मकानों को एक के बाद एक कर धराशायी करना शुरू किया तो दूर खड़े परिवार रोने बिलखने लगे। हर कोई यह बयां कर रहा था कि परिवार को लेकर जाएं तो जाएं कहां। कोई प्रशासन से मलबे की ईंट देने की गुहार लगा रहा था तो कोई सामान निकालने की मोहलत मांग रहा था। जिसे देख वहां से गुजरने वाले राहगीर भी ग्रामीणों की बेबसी को देखकर हैरान व परेशान होते नजर आए। बेघर होते लोगों को देखकर हर किसी के मन में पीड़ा नजर आयी।




