काशीपुर बाईपास मार्ग के चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज होने और प्रभावित व्यापारियों को दुकानें हटाने के लिए प्रशासन ने समय सीमा निर्धारित किए जाने के बीच महापौर विकास शर्मा ने पुनर्वास की दिशा में बड़ी पहल की है। बुधवार को उन्होंने अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, उप जिलाधिकारी मनीष कुमार तथा अन्य अधिकारियों के साथ काशीपुर बाईपास स्थित इंडेन गैस एजेंसी के निकट व्यापारियों के पुनर्वास के लिए प्रस्तावित भूमि का विस्तृत निरीक्षण किया। इसके साथ ही इंडेन गैस एजेंसी को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना के तहत खानपुर और फुलसुंगा क्षेत्र में भी संभावित भूमि का सर्वे किया गया। महापौर ने कहा कि नगर निगम और जिला प्रशासन की प्राथमिकता सड़क चौड़ीकरण के साथ साथ प्रभावित व्यापारियों का सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करना है। किसी भी व्यापारी को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के अपना कारोबार बंद नहीं करना पड़ेगा और न ही किसी को सड़क पर आने दिया जाएगा।
काशीपुर बाईपास मार्ग शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। लगातार बढ़ते यातायात और जाम की समस्या को देखते हुए लंबे समय से इसके चौड़ीकरण की मांग की जा रही थी। परियोजना के लिए शासन से बजट भी स्वीकृत हो चुका है और अब कार्य शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। चौड़ीकरण की जद में नगर निगम की 28 दुकानों सहित बड़ी संख्या में निजी प्रतिष्ठान आ रहे हैं। पूर्व में व्यापारियों ने सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई कम करने की मांग उठाई थी। इस पर महापौर विकास शर्मा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से वार्ता की थी, जिसके बाद सड़क की चौड़ाई में आंशिक संशोधन किया गया। इसके बावजूद कुछ दुकानें परियोजना की जद में बनी हुई हैं।
महापौर ने कहा कि नगर निगम पहले भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रभावित कई दुकानदारों का वेडिंग जोन में पुनर्वास करा चुका है। इसके अलावा रोडवेज परिसर के पास चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की जद में आने वाले व्यापारियों के लिए भी वैकल्पिक दुकानों की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि धामी सरकार की नीति विकास और जनहित को साथ लेकर चलने की है। सड़क चौड़ीकरण शहर के भविष्य के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके साथ किसी भी व्यापारी की आजीविका प्रभावित न हो, यह भी सरकार की समान प्राथमिकता है।
महापौर ने कहा कि प्रस्तावित बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा और इसमें बड़ी संख्या में व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित किए जा सकेंगे। इससे न केवल प्रभावित व्यापारियों को स्थायी पुनर्वास मिलेगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि इस परियोजना को सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के तहत विकसित करने की योजना है।






