रुद्रपुर, भीषण सड़क हादसे में हुई चार मौतों के प्रकरण में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने जिला अस्पताल के ओपीडी गेट पर धरना प्रदर्शन किया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। आरोप था कि जिस वक्त गर्भवती महिला को देर रात्रि अस्पताल लाया गया। उस वक्त वह नौ माह की गर्भवती थी। डॉक्टर या अस्पताल स्टाफ चाहता तो गर्भवती को भर्ती कर सकता था या फिर एंबुलेंस की व्यवस्था हो सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं किया। जिस कारण सड़क हादसे में चार लोगों की मृत्यु हो गई। शनिवार की सुबह साढ़े दस बजे पूर्व विधायक ठुकराल समर्थकों के साथ अस्पताल परिसर पहुंचे। जहां उन्होंने ओपीडी गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। ठुकराल का कहना था कि 20 से 21 अगस्त की मध्यरात्रि सुभाष कॉलोनी निवासी प्रमोद साहनी के भांजे की पत्नी ज्योति को प्रसव पीड़ा हुई थी। देर रात्रि डेढ़ बजे के करीब कुटुम्ब की महिलाएं-पुरुष गर्भवती को लेकर जिला अस्पताल के प्रसव आपात कक्ष ले गए थे। जहां ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने उपचार देने की बजाय सुबह आने की सलाह दी। जब महिलाएं गर्भवती को ई-रिक्शा में बैठकर वापस घर जा रही थी तो नैनीताल हाईवे पर कार ने ई-रिक्शा को टक्कर मार दी। इसमें प्रमोद साहनी की पत्नी विभा, भाभी उर्मिला, भांजे की पत्नी गर्भवती ज्योति और ई-रिक्शा चालक मनोज साहनी की दर्दनाक मौत हो गई। पूर्व विधायक का आरोप था कि स्वास्थ्य कर्मी चाहते तो गर्भवती को भर्ती कर उपचार प्रारंभ कर सकते थे। उस रात्रि भारी बारिश भी हो रही थी या फिर एंबुलेंस से गर्भवती को छुड़वा भी सकते थे। यदि डॉक्टर व स्टाफ ने सजगता दिखाई होती तो शायद चार जिंदगियां बच सकती थी। ठुकराल का आरोप था कि मुख्यालय का सरकारी अस्पताल महज रेफरर सेंटर बन चुका है। जहां डॉक्टर बाहरी दवाईयां व निजी अस्पतालों में मरीजों को रेफर कर रहे हैं। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पीएमएस केके अग्रवाल से लापरवाही प्रकरण की जांच कर डॉक्टर व स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने की मांग की। आगाह किया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो जनसैलाब के साथ अस्पताल का घेराव किया जाएगा।




