रूद्रपुर। भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान द्वारा विधानसभा में चर्चा के दौरान बंगाली समाज के प्रति दिये गये वक्तव्य के बाद से बंगाली समाज में पनपा रोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज बंगाली समाज के वरिष्ठ नेता परिमल राय के नेतृत्व में समाज के सैकड़ों महिला पुरुषों ने ट्रांजिट कैंप में विधायक मुन्ना चौहान के पुतले की शव यात्रा निकाल कर पुतले को आग के हवाले किया। इससे पूर्व बंगाली समाज के सैकड़ों लोग गोविन्द मंदिर के समक्ष एकत्रित हुए। वहां उन्हें संबोधित करते हुए परिमल राय ने कहा कि लगता है विधायक मुन्ना चौहान को बंगाली समाज के इतिहास की कोई जानकारी नहीं है या फिर उन्होंने एक सोची समझी साजिश के तहत यह वक्तव्य दिया है। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाती है तो वहीं दूसरी ओर उसके विधायक अलगाववाद को बढ़ाने की बात करते हैं। परिमल ने कहा कि बंगाली समाज पिछले कई दशकों से नमो शूद्र, व पोंड़ जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के लिए संघर्ष कर रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा भी जा चुका है लेकिन वह मामला आज भी लंबित रखा गया है। श्री राय ने कहा कि बंगाली समाज ऐसे किसी भी वक्तव्य को बर्दाश्त नहीं करेगा जिससे उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचती हो। उन्होंने कहा कि भाजपा का एक विधान एक निशान का नारा भी आज खोखला साबित हो रहा है। बंगाली समाज हमेशा एकजुट रहा है और रहेगा। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा पूर्वी पाकिस्तान व बंगाल से यहां आए बंगाली समाज के लोगों को भूमि देकर विस्थापित किया गया था। जिसके बाद से समाज के लोगों ने यहां के विकास में हमेशा योगदान किया। देश की आजादी के दौरान भी बंगाली समाज के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। लेकिन विधायक चौहान जानबूझकर इससे अंजान बनने की कोशिश कर रहे हैं। परिमल राय ने विधायक मुन्ना सिंह चौहान से अपने दिये गये वक्तव्य के लिए सार्वजनिक रूप से बंगाली समाज से माफी मांगने और प्रायश्चित के रूप विधायक पद से इस्तीफा देने की मांग की। इस दौरान अन्य कई वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इसके बाद सभी लोग विधायक मुन्ना चौहान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके पुतले की शव यात्रा लेकर निकल पड़े। जो गोविन्द मंदिर से प्रारम्भ होकर क्षेत्र के कई मुख्य मार्गों से होकर गुजरती हुई वापस गोविन्द मंदिर पहुंची वहां नारेबाजी के साथ विधायक चौहान के पुतले को आग के हवाले किया गया। इस दौरान नन्द शेखर गांगुली, भरत विश्वास, केरू मंडल, अमल सरकार, बाबू सरदार, रामपद मिस्त्री, मोती बाल, गौतम सिकदार ब्रजेन मिस्त्री, शुभम दास, अर्जुन विश्वास, विराज साह, पिंटू राय, गोपी मंडल, संवीत सरकार, सुशील, सरिता, सावित्री, झरना रानी, कुसुम देवी, ललिता साह, वासु साह, मिथुन साह, बिट्टू मंडल अमल राव, सिद्धार्थ सरकार, खोखन बाछाड, परिमल सरकार, पूरन साना, शुभम मंडल, शम्भू साह, तपन गोलदार, मंगल मंडल, रतन, कमल, मंगल सरदार, गोपी हालदार सहित बंगाली समाज के सैकड़ों लोग मौजूद थे।




