रुद्रपुर :-ऊधमसिंह नगर में भोले-भाले लोगों को अपना घर का सपना दिखाकर रकम हड़पने के मामले बेहताशा बढे है और पीड़ित इंसाफ के लिए दर-दर भटका रहता था,लेकिन अब एसएसपी अजय गणपति कुंभार ने गठित एसआईटी को आदेशित किया है कि शिकायती पत्रों के आधार पर सि विल और क्रिमिनल मामलों की फाइल को अलग करें और धोखाधडी करने वाले बिल्डर को चिह्नित करे। साथ ही शिकायती पत्र के आधार पर मुकदमा भी पंजीकृत किया जाएं।
बताते चले कि जिले में बिल्डर्स द्वारा कॉलोनी विकसित कर भोले-भाले लोगों को अपना घर का सपना दिखाया जाता है और सस्ते प्लाट या मकान का खूबियां गिनाकर बिक्री कर देता है। लेकिन रजिस्ट्री या कब्जा देने के वक्त मुकर जाता है। जिसके बाद पीड़ित दर-दर की ठोकरें खाता है और हार थक एसआईटी या पुलिस को तहरीर देकर न्याय का इंतजार करता है और मामला एसआईटी की जांच रिपोर्ट में टिक जाता है। तकनीकी और मैनुअल जांच होने के कारण जांच लटकी रहती है और पीड़ित पुलिस कार्यालय के चक्कर काटता रहता है। इन सभी मामलों को ध्यान में रखते हुए एसएसपी अजय गणपति कुंभार ने एसआईटी को आदेशित किया है कि लंबित शिकायती पत्रों की जांच कर सिविल और क्रिमिनल मामलों को अलग करे और क्रिमिनल प्रकरण पर मुकदमा दर्ज करे और सिविल मामलों की एक रिपोर्ट कुमाऊं कमिश्नर और आईजी कुमाऊं को भेजे। ताकि सुनवाई के बाद फौरन कार्रवाई हो सके। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि एसआईटी की जांच कर रफ्तार तेज होती है और शिकायती पत्रों पर सुनवाई हो जाती है। तो भोले-भाले लोगों को धोखा देकर पैसा हड़पने वाले बिल्डर्स के खिलाफ ताबड़तोड़ मुकदमे भी पंजीकृत हो सकते है।
रुद्रपुर। सीओ सदर विभव सैनी ने बताया कि अक्सर जमीनी विवाद दो प्रकार के होते है। जैसे कोई बिल्डर कॉलोनी का निर्माण कर प्लांट की बिक्री करता है और एक ही व्यक्ति को बेचकर पैसा और कब्जा नहीं देता है। ऐसे में अपराध की श्रेणी में आते है और दूसरे मामलों में कोई बिल्डर कम भूखंड पर कॉलोनी काटकर ज्यादा लोगों को बेच देता है और एक प्लाट के कई दावेदार होते है। ऐसे मामले सिविल कोर्ट यानी प्रशासनिक सुनवाई के दायरे में आते है। तराई भावर दोनों ही प्रकार के मामले ज्यादा आते है।
रुद्रपुर। एसएसपी अजय गणपति कुंभार ने बताया कि क्रिमिनल प्रकरण में अब एसआईटी पीड़ित के पास मौजूद पुख्ता सबूत व साक्ष्य और आरोपी व्यक्ति को बुलाकर प्रारंभिक पूछताछ करेगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर फौरन मुकदमा पंजीकृत करेगी। साथ ही एसआईटी को जांच का आधार और समय सीमा भी निर्धारित की जाएंगी। इसके लिए एसआईटी के साथ बैठक कर जानकारी मांगी जाएंगी।