*प्रवीण कुमार*
बरेली के इस्लामी इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले गोपाल नामक छात्र ने एक अनोखी “वाटर ट्रेन” तैयार की है, जो केवल 250 मिलीलीटर पानी से 50 मीटर तक चल सकती है। इस मॉडल को तैयार करने में गोपाल को पाँच साल का लंबा वक्त लगा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अब उन्होंने इस इनोवेशन को पेटेंट कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
कैसे काम करती है यह ट्रेन:
गोपाल के अनुसार, जैसे ही पानी इंजन में डाला जाता है, वह पहले बिजली जनरेट करता है और फिर उसी ऊर्जा से ट्रेन दौड़ती है। इसमें डीजल या बाहरी बिजली की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती। इस तकनीक को यदि बड़े पैमाने पर विकसित किया जाए, तो यह पर्यावरण के लिए वरदान साबित हो सकती है और रेलवे संचालन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। इससे रेलवे के खर्च में भी भारी कमी आ सकती है।
तीन छात्राओं का साथ और तकनीकी योगदान:
इस प्रोजेक्ट में गोपाल के साथ तीन छात्राओं — यासमीन अंसारी, काशिफा और लायबा — का भी बड़ा योगदान है। ये तीनों छात्राएं NEET की तैयारी कर रही हैं और इन्होंने टेक्निकल प्लानिंग और डिजाइनिंग जैसे हिस्सों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संघर्षों से भरी सफलता की कहानी:
गोपाल की पारिवारिक पृष्ठभूमि बहुत साधारण है। उनके पिता जगदीश कुमार इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज परिसर में चार पीढ़ियों से कैंटीन चला रहे हैं। गोपाल खुद भी कॉलेज की कैंटीन में पिता के साथ काम करते हैं। बीएससी 2021 में पूरी करने वाले गोपाल 2020 से इस ट्रेन के मॉडल पर काम कर रहे हैं।
वह दिन में कैंटीन में काम करते हैं और रात को अपने प्रोजेक्ट और UPSC की पढ़ाई में समय लगाते हैं। संसाधनों की कमी, असफल मॉडल और कई तकनीकी रुकावटों के बावजूद गोपाल ने कभी हार नहीं मानी। अब तक इस मॉडल में लगभग 5 लाख रुपये का खर्च आ चुका है।
स्कूल का समर्थन और भविष्य की उम्मीदें:
स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने गोपाल को इस सफर में हर तरह का सहयोग दिया। गोपाल को उम्मीद है कि सरकार और वैज्ञानिक संस्थान इस इनोवेशन पर ध्यान देंगे और इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के प्रयास किए जाएंगे।




