सितारगंज। सिडकुल फेज-2 के 33 केवी विद्युत उप संस्थान के कंट्रोल रूम में सोमवार की सुबह अचानक घुसे एक भालू ने ऊर्जा निगम कर्मचारियों के होश- फाख्ता कर दिए। करीब छह घंटे तक ऊर्जा निगम और वन विभाग के कर्मी भालू को रेस्क्यू करने की तरकीब ढूंढ़ते रहे। इसके बाद हल्द्वानी से आए विशेषज्ञों की टीम ने करीब साढ़े सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद भालू को रेस्क्यू किया। भालू को रेस्क्यू करने के बाद उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।
सोमवार सुबह पॉवर स्टेशन परिसर में भालू होने की सूचना से हड़कंप मच गया। अचानक इस तरह भालू के पावर स्टेशन में घुस आने से वहां अफरा-तफरी मच गई। भालू की मौजूदगी के बीच ऊर्जा निगम कर्मियों को उसे रेस्क्यू करने या बाहर निकालने की कोई तरकीब नहीं सुझी। इसके बाद स्थानीय वन कर्मियों को जानकारी दी गई। इसके बाद वन विभाग की टीम ने भालू की लोकेशन ट्रेस की लेकिन उसको रेस्क्यू करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत थी। इसके बाद भालू को रेस्क्यू करने के लिए हल्द्वानी से वन विभाग के विशेषज्ञों की विशेष टीम बुलाई गई।
हल्द्वानी से आई वन विभाग की विशेषज्ञ टीम ने सुबह 11 बजे से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। शाम करीब साढ़े छह बजे कड़ी मशक्कत के बाद भालू को सकुशल रेस्क्यू किया गया। ट्रैंक्विलाइज़र से बेहोश कर रेस्क्यू किया गया। देर शाम भालू को जंगल में छोड़ दिया। इधर भालू के 33 केवी विद्युत उप संस्थान के कंट्रोल रूम में घुसने से सोमवार को देर सायं तक 11 केवी के समस्त उपभोक्ताओं की बिजली बाधित रही।
किशनपुर रेंजर घनानन्द चनियाल ने बताया कि सोमवार तड़के पांच बजे सिडकुल फेज 2 के विद्युत पॉवर स्टेशन में मादा भालू की मौजूदगी की सूचना मिली थी। डॉ. तरुण कुमार गर्ग, डॉ. राहुल सती की देखरेख में रेस्क्यू अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान एसडीओ हर्षित जायसवाल, वन दरोगा संजय कुमार, राजेश खन्ना, प्रकाश राणा, सतेंद्र कुमार, रवि लटवाल, मातवर बिष्ट, दीपू सिंह, मुजाहिद हुसैन, संदीप सक्सेना, इरशाद, मोहन जोशी, कैलाश सिंह बिष्ट, किशन दत्त तिवारी, मुजाहिद, मातवर, भुवन तिवारी रहे।




