रुद्रपुर । उत्तराखंड की सीमा पर स्थित निकटवर्ती ग्राम डिबडिबा की सेठी कालोनी में बुधवार रात अज्ञात बदमाशों ने घर में सोए वृद्ध की धारदार हथियारों से हमला कर निर्मम हत्या कर दी। प्रातः मामले की जानकारी मिलने पर उत्तर प्रदेश पुलिस के कई अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव कब्जे में लिया और परिजनों से आवश्यक जानकारी ली। घटनास्थल से फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्रित किये।
परिजनों द्वारा घटना के पीछे कुछ लोगों से जमीनी विवाद होना बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश सीमा के ग्राम डिबडिबा की सेठी कॉलोनी निवासी करीब 70 वर्षीय मुसाफिर साहनी पुत्र जलधारी सहनी की पत्नी सुदम्या देवी गत दिवस दवा लेने के लिए ग्राम भूरारानी निवासी रिश्तेदार के घर गई थी और रात में वहीं रूक गई। घर में मुसाफिर साहनी अकेले रात में खाना खाकर सो गये थे। प्रातः करीब 8 बजे उनका पोता शंकर पुत्र स्व. राजन वहां आया तो घर का दरवाजा खुला हुआ था।जब उसने दरवाजा खोलकर भीतर देखा तो उसके होश उड़ गये। कमरे में उसके दादा मुसाफिर फर्श पर खून से लथपथ पड़े हुए थे। कमरे का सामान भी इधर उधर बिखरा हुआ था। उसने घटना की जानकारी तुरंत अपने परिजनों के साथ ही ग्राम प्रधान को दी। सूचना मिलते ही वहां कई लागे आ पहुंचे। ग्राम प्रधान ने मामले की जानकारी पुलिस को दी । सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस के कई अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर आ पहुंचे और उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर परिजनों से आवश्यक जानकारी ली।
सूचना मिलने पर फोरेंसिक टीम ने भी वहां आकर कमरे का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाये। बताया जाता है कि मृतक मुसाफिर के सिर एवं गर्दन पर चोट के गहरे निशान हैं। इधर परिजनों का आरोप है कि उनके पिता का जमीन को लेकर कुछ लोगों से पिछले काफी समय से विवाद चला आ रहा है और वह कई बार जान से मारने की धमकियां भी दे चुके हैं। कमरे का बिखरा सामान देखकर सम्भावना जताई जा रही है कि मुसाफिर ने मौत से पहले खुद को बचाने का पूरा प्रयास किया है। वहीं पुलिस का कहना है कि घटना की कई बिंदुओं पर जांच शुरू कर दी गई है। परिजनों की तहरीर मिलने पर आगे की कार्रवाई की जायेगी। मृतक मुसाफिर के दो पुत्रो में एक राजन की पूर्व में मौत हो चुकी है जबकि दूसरे पुत्र धर्मेन्द्र तथा दो पुत्रियों रीता व चम्पा का विवाह हो चुका है। मुसाफिर अपनी पत्नी सुदयना देवी के साथ सेठी कालोनी में रहते थे। कुछ समय पूर्व ही उन्होंने अपनी झोपड़ी को पक्के मकान का रूप दिया था।




