रिपोर्ट.. *प्रवीण कुमार*
26 में से सिर्फ 2 को मिला लोन दो साल से आंवला का खाता ‘शून्य’, आखिर कहाँ गया
युवाओं का हक?
बरेली/आंवला
सरकार की रोजगार योजनाओं का जमीनी सच क्या है इसका एक चौंकाने वाला खुलासा आंवला-बरेली से समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य के सवाल पर संसद में हुआ है। जिस प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के दम पर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया जाता है, वह आंवला संसदीय क्षेत्र में पूरी तरह से ‘फ्लॉप’ साबित हो रहा है।
दो साल से ‘जीरो’ प्रोग्रेस सरकार ने खुद लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 में आंवला क्षेत्र में न तो कोई ऋण स्वीकृत हुआ और न ही कोई सब्सिडी जारी की गई।
आंवला क्षेत्र से 26 युवाओं ने रोजगार के लिए आवेदन किया, लेकिन बैंक और प्रशासन की फाइलों में दबकर रह गए अरमान। महज 2 आवेदकों को ही ऋण मिल पाया।
साल 2022-23 में केवल 6.04 लाख रुपये की मामूली सब्सिडी दिखाई गई, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
बैंक और सिस्टम की सुस्ती ने तोड़ी कमर
सांसद नीरज मौर्य के तीखे सवाल पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करांदलाजे ने माना कि बैंक स्तर पर ऋण स्वीकृति में देरी, जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया और सिस्टम की धीमी रफ्तार योजना की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है। सवाल यह है कि जब युवाओं के पास आइडिया है और आवेदन भी, तो सरकार और बैंक उन्हें रोक क्यों रहे हैं
इस खुलासे पर तंज कसते हुए सांसद नीरज मौर्य ने कहा आंवला के युवाओं और छोटे उद्यमियों को योजना से वंचित रखना सरकार की बड़ी नीतिगत विफलता है। सरकार केवल आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है, जबकि जमीन पर युवा बेरोजगार घूम रहा है। मैं सदन से लेकर सड़क तक जनता के हक की लड़ाई जारी रखूंगा।




