उत्पीड़न पर फूटा  डॉल्फिन कंपनी के श्रमिकों का गुस्सा  दर्जनों श्रमिक कंपनी गेट पर एकत्रित हुए और धरने पर बैठ गए  सूचना पर पहुंची पुलिस की श्रमिकों से हुई  नोकझोंक 

रूद्रपुर। सिडकुल की डॉल्फिन कंपनी के श्रमिकों ने प्रबंधन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए प्रबंधन श्रमिकों का शोषण किया जा रहा है। श्रमिकों ने प्रबंधन पर कंपनी बेस श्रमिकों को ठेके के अधीन काम कराने का भी आरोप लगाया। इस बीच सूचना पर पहुंची पुलिस की श्रमिकों से नोकझोंक हुई।

गुरुवार को कंपनी के दर्जनों श्रमिक कंपनी गेट पर एकत्रित हुए और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया और गेट के पास ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान श्रमिक महिलाओं का कहना था कि वह कई वर्षों से कंपनी बेस पर काम कर रही। आरोप है कि अब प्रबंधन ठेके के अधीन काम कराने के लिए दबाव बना रहा है। महिलाओं का यह भी आरोप है कि प्रबंधन 12- 12 घंटे से अधिक काम करा रहा है। महिलाओं ने बताया कि प्रबंधन ने सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए हैं। उन्होंने प्रबंधन पर तानाशाही का आरोप लगाया। इस बीच मौके पर पहुंची पुलिस की श्रमिकों के साथ नोकझोंक भी हुई।  उन्होंने श्रमिकों को सरकार की गाइडलाइन के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है। श्रमिकों ने श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया। प्रदर्शनकारियों ने श्रमिकों पर लागू की गयी गेटबंदी को तत्काल समाप्त करने, श्रमिकों को डॉल्फिन कंपनी के अन्य प्रतिष्ठानों में स्थानांतरण हेतु लिखित आदेश जारी करने के पश्चात ही उनका स्थानांतरण करने , श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान, ओवरटाइम और बोनस में बकाया धनराशि का भुगतान करने, कर्मचारियों के पंच नंबरों को जबरन बदलने पर रोक लगाने, वर्षों से कार्यरत श्रमिकों को स्थाई नियुक्ति प्रदान करने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक श्रमिकों का धरना जारी था और पुलिस भी मौके पर तैनात था। इधर कंपनी प्रबंधन से इस मामले में जानकारी चाही तो उसने संपर्क नहीं हो सका।

प्रदर्शन करने वालों में कांति प्रसाद, सोनू कुमार, सुनीता, बबलू सिंह, राजेन्द्र कुमार, वीरेन्द्र, नेत राम, प्रमोद कुमार, ओमप्रकाश, मंगल, सुनील, आकाश, राजपाल, कृष्ण पाल, प्रवेश, श्रीपाल, लाल सिंह, रवि राठौर, देवेन्द्र कुमार, कुंवरपाल, ब्रिजेश कुमार, राकेश,सर्वेश कुमार, सोमपाल, प्रदीप, रामाशंकर, धर्मेन्द्र कुमार, ब्रहमपाल, जगदीश, अरविंद, शेर सिंह, मनोज, रजनी, रेनू, अमित कुमार, राजकुमार, रंजीत, नीरज, सूरज, महेश, राजा, राहुल, जगतपाल, वीरेन्द्र, आकाश कुमार, राजीव, रामपला, अतर सिंह, सोनू कुमार, मुनीश कुमार, मुनीम, ब्रिजेश, अंजन लाल, वीर सिंह, धर्मेन्द्र कुमार, दिनेश कुमार, रोहित आदि समेत सैकड़ों श्रमिक थे।

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