रूद्रपुर। वसीयत व विवाह पंजीकरण के कार्यों से अधिवक्तागण एवं दस्तावेज लेखकों को हटाये जाने तथा यूसीसी वेबसाइट पर पोर्टल बनाये जाने व पेपर लैस ऑनलाइन पंजीकरण के कार्यों से उन्हें वंचित न किये जाने की मांगों को लेकर पन्द्रहवें दिन भी वकीलों व दस्तावेज लेखकों का धरना जारी रहा।
धारना स्थल पर वरिष्ठ अधिवक्ता निरंजन पंत ने कहा कि सरकार अधिावक्ताओं के विरू) नये कानून व अधिनियम लाकर उन्हें उनके कार्यों से विरत करने का काम कर रही है बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि जो अधिवक्ता वर्ग हमेशा दूसरों के हितों के लिए लड़ता है आज उसे सड़कों पर आकर अपने लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा यूसीसी लागू करने के पश्चात विवाह व इच्छा प= पंजीकरण के कार्यों से अधिवक्ताओं व दस्तावेज लेखकों की सहभागिता से उन्हें बाहर कर दिया गया है और अब पैपर लैस ऑनलाईन रजिस्ट्रीकरण के कार्य से भी सरकार द्वारा उन्हें बाहर किया जा सकता है, जिसे किसी भी दशा में बर्दाशत नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण उत्तराखंड के अधिवक्ता लगातार अपना कार्य बहिष्कार करके आन्दोलन कर रहे है और सरकार से मांग कर रहे है कि यूसीसी पोर्टल से सीएसी सेंटरों को हटाकर उनका पोर्टल बनाया जाए और भविष्य में पेपर लैस पंजीकरण के कार्यों से उन्हे अलग न किया जाये लेकिन सरकार द्वारा अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। एडवोकेट निरंजन पंत ने पूरे राज्य के अधिवक्ताओं से अपील की है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती है तब तक वह अपना संघर्ष जारी रखेंगे। वहीं अधिवक्ताओं व दस्तावेज लेखकों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार अधिवक्ताओं व दस्तावेज लेखकों को शामिल नहीं करती है तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धारना स्थल पर एडवाकेट प्रमोद मित्तल, गुरदीप सिंह, दिवाकर पाण्डेय, मुनीश गिरी, अशोक चन्द्र, भजन बत्र, अशोक कुमार सागर, जसपाल सिंह, महिपाल सिंह, सुनील कुमार, जगदीज कुमार, राजीव सक्सेना, उदय राठौर, रोहन मिश्रा, गणेज चन्द्र, ‘ाुभम तिवारी, दलजीत सिंह, राजेज विज्वास, विपेन्द्र कुमार गुप्ता, नरेन्द्र सिंह बि”ट, दस्तावेज लेखक चंचल सिंह धापोला, शेखर शर्मा, कपिल छाबड़ा, सगीर अहमद, उत्तम मण्डल, पृथ्वी, भुवन अवस्थी, सुनील बजाज, गौरव सक्सेना, मजहर रिजवी सहित तमाम अधिावक्ता व दस्तावेज लेखक एवं स्टाम्प विक्रेता मौजूद रहे।




