निजी अस्पताल में छह दिन के नवजात शिशु की मौत, हंगामा सूचना पर पहुंची पुलिस ने आक्रोशित लोगों को शांत कर शव भेजा पोस्टमार्टम को

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निजी अस्पताल में छह दिन के नवजात शिशु की मौत, हंगामा सूचना पर पहुंची पुलिस ने आक्रोशित लोगों को शांत कर शव भेजा पोस्टमार्टम क बिना डॉक्टर के संचालित हो रहा अस्पताल

परिजनों ने पुलिस को सौंपी अस्पताल के खिलाफ तहरीर, उपचार में लापरवाही का आरोप

रुद्रपुर। महानगर के प्रीत बिहार क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान छह दिन के नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजनों ने उपचार में लापरवाही का अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। परिजनों ने अस्पताल संचालक के खिलाफ कार्रवाई को तहरीर पुलिस को दी। अस्पताल में कोई डॉक्टर भी नहीं मिला है।

जानकारी के मुताबिक शहर के प्रीत विहार क्षेत्र में संचालित न्यू मेडी स्टार हॉस्पिटल में मंगलवार को गुरुनानक डिग्री कालेज के निकट निवासी नीरज ने अपने तीन दिन के बालक को भर्ती कराया था, जिसकी गुरुवार को मौत हो गई। बच्चे की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने बच्चे की मौत गलत दवा व इंजेक्शन देने की वजह से होने के आरोप लगाए हैं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्चे के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस मौके पहुंची तो अस्पताल में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था, बताया जा रहा कुछ अस्पताल में कोई भी डिग्रीधारी चिकित्सा नहीं है। अस्पताल के संचालक ने एक अस्पताल में कुछ दिनों बतौर कंपाउंडर काम करने के बाद अस्पताल खोले रखा है, जिसका स्वस्थ्य विभाग से रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया गया है। लोगों की मानें तो अस्पताल में पिछले कुछ दिनों में एक महिला समेत कई बच्चों की मौत हो चुकी है। बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल का संचालन कैसे हो रहा था, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। बताया जा रहा कि जिस भवन में अस्पताल का संचालन हो रहा है,उसकी बिल्डिंग अवैध है। अस्पताल जिस भवन में संचालित हो रहा है,वह क्षेत्र सीलिंग प्रभावित क्षेत्र में आता है,जिसपर हाईकोर्ट निर्माण पर रोक लगा चुका है, इसके बाद भी संचालन ने सांठगांठ करके भवन का निर्माण किया है।

नीरज पाल की ओर से अस्पताल संचालक के खिलाफ कार्रवाई को तहरीर पुलिस को दी। अस्पताल प्रबंधन ने उसे बताया था कि अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद हैं, बच्चे का ठीक से इजाल किया जाएगा। गुरुवार को अस्पताल में कंपाउंडर द्वारा बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया। नीरज ने बताया कि अस्पताल में कोई बाल रोग विशेषज्ञ व डिग्रीधारी डॉक्टर नहीं है । दो दिन से सिर्फ कंपाउंडर ही बच्चों का इलाज कर रहे थे। एसएसआई कमाल हसन ने मामले की जांच दरोगा जय प्रकाश को सौंपी है। कमाल हसन ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आरोपी पर कार्रवाई की जाएगी। इधर अस्पताल संचालक से इस मामले में जानकारी को संपर्क किया तो संपर्क नहीं हो सका।

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