बरेली। सोशल मीडिया की ताक़त जब जनहित से जुड़ती है, तो बदलाव की नई कहानी लिखती है। बरेली जोन पुलिस का डिजिटल रोड सेफ्टी अभियान ‘परवाह (CARE)’ इसका बेहतरीन उदाहरण बन गया है। इस अभियान ने एक महीने में 1 करोड़ से अधिक लोगों तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाकर न सिर्फ़ रिकॉर्ड बनाया, बल्कि सोशल मीडिया के मंच पर नकारात्मकता के विरुद्ध एक सकारात्मक बिगुल भी फूंका।एडीजी रमित शर्मा ने बरेली जोन मुख्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में कहा अब वक्त है सोशल मीडिया को अफवाह और भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ हमारा हथियार बनाने का। ‘परवाह’ जैसा अभियान नेगेटिव नेरेटिव का मुंहतोड़ जवाब है।” जोनल स्तर पर चमकी ये टीमें,,प्रथम पुरस्कार जनपद रामपुर द्वितीय पुरस्कार जनपद बरेली तृतीय पुरस्कार यातायात पुलिस, बरेली
प्रोत्साहन पुरस्कार: बदायूं, मुरादाबाद, ट्रैफिक पुलिस मुरादाबाद
विशेष सराहना: बरेली परिक्षेत्र, मुरादाबाद परिक्षेत्र, बरेली जोन
परवाह’ की डिजिटल धमक 1,00,50,530 डिजिटल व्यूज 10,41,943 सोशल मीडिया इंटरैक्शन लाइक्स, शेयर, रिप्लाई
5785 पोस्ट | 1828 पोस्टर | 2618 टेम्पलेट | 1144 वीडियो
जमीन से सोशल मीडिया तक असरदार रणनीति
रामपुर पुलिस ने अभियान की शुरुआत थाना स्तर पर वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर की।
ट्रैफिक कांस्टेबल पूजा ने स्कूल-कॉलेजों और सामाजिक कार्यक्रमों में जाकर सीधी बातचीत से लोगों को जागरूक किया।
सोशल मीडिया पर चलाए गए क्रिएटिव्स और स्लोगन ने खासकर युवाओं और महिलाओं को गहराई से प्रभावित किया।
बरेली पुलिस का वायरल क्रिएटिव बना चर्चा का विषय
भैंसे पर बैठे यमराज के सीट बेल्ट क्रिएटिव और
“करवा चौथ आ रही है, हेलमेट लगाएं नहीं तो छिन जाएगा सुहाग” जैसे नारे सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हुए।
ट्रैफिक पुलिस बरेली ने मारी बाज़ी
फेसबुक पर सर्वाधिक व्यूज़ और सराहना।
महिलाओं व युवाओं से संवाद कर अभियान को धार दी। एसपी ट्रैफिक मोहम्मद अकमल खान और एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने इसे नई ऊंचाई दी।
सम्मान समारोह में कुल 65 पुलिसकर्मी हुए पुरस्कृत एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय साहनी एसएसपी आर्य समेत आला अफसरों ने शील्ड, प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर टीमों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम संचालन किया इंस्पेक्टर विप्लव शर्मा ने।
हाइब्रिड प्रजेंटेशन के माध्यम से अन्य जनपदों को प्रशिक्षित भी किया गया।
‘परवाह’ सिर्फ़ एक अभियान नहीं, सोशल मीडिया की पॉजिटिव ताक़त का प्रमाण है। यह बताता है कि जब अफसर सोच बदलते हैं, तो समाज दिशा बदलता है।




