बरेली। डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों के बीच एक 8वीं कक्षा के छात्र ने अपनी सूझबूझ से ऐसा काम कर दिखाया, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। जहां बड़े-बड़े लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं, वहीं इस नन्हे बच्चे ने अपनी समझदारी से न सिर्फ अपने माता-पिता को “डिजिटल अरेस्ट” जैसे गंभीर साइबर फ्रॉड से बचाया, बल्कि लाखों रुपये की ठगी भी टाल दी।
मामले के अनुसार, साइबर ठगों ने छात्र के माता-पिता को फोन कर खुद को अधिकारी बताते हुए डराया-धमकाया और “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर करीब 9 से 10 घंटे तक फोन पर ही बंधक बनाए रखा। ठग लगातार दबाव बनाकर बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। परिवार पूरी तरह घबराया हुआ था और ठगी का खतरा बढ़ता जा रहा था।
इसी बीच घर में मौजूद 8वीं के छात्र ने स्थिति को भांप लिया। उसने बिना घबराए समझदारी दिखाते हुए मोबाइल को तुरंत फ्लाइट मोड पर डाल दिया, जिससे ठगों का संपर्क टूट गया और पूरा परिवार साइबर जाल से बाहर निकल आया। बच्चे की इस सूझबूझ से न केवल ठगी रुक गई, बल्कि एक बड़ा नुकसान होने से भी बच गया।
इस सराहनीय कार्य की जानकारी जब समाज के लोगों और संगठनों तक पहुंची, तो हर किसी ने बच्चे की जमकर प्रशंसा की। पीस कमेटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष नदीम इकबाल ने छात्र को विशेष रूप से सम्मानित करते हुए उसे “बाल साइबर प्रहरी” की उपाधि दी। उन्होंने कहा कि यह बच्चा समाज के लिए प्रेरणा है और आज के समय में साइबर जागरूकता कितनी जरूरी है, इसका जीता-जागता उदाहरण है।
नदीम इकबाल ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी अनजान कॉल या दबाव में आकर अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी साझा न करें। यदि कोई खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य अधिकारी बताकर डराए, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और संबंधित विभाग से सत्यापन करें।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि जागरूकता उम्र की मोहताज नहीं होती। एक छोटे से बच्चे की समझदारी ने पूरे परिवार को सुरक्षित रखा और समाज को एक बड़ा संदेश दिया।






