रुद्पुर- हिमाचल के कारोबारी के घर हुई करोड़ों की चोरी का सोना और नकदी बटवारे में फंसे आबकारी दरोगा और सिपाही का यह कोई पहला मामला नही था। पिछले तीन सालों में खुद जिला आबकारी अधिकारी सहित कर्मचारी रिश्वत खोरी और भ्र्ष्टाचार मामलों में जेल की हवा खा चुके है। जिसने सबसे ज्यादा चर्चित मामले चार हुए। अब सवाल यह हैं कि जिले की आबकारी विभाग खाकी पर लगे भ्र्ष्टाचार के दाग कैसे साफ करेगी।
वर्ष 2024 में विजिलेंस की टीम ने जिला आबकारी कार्यालय में तैनात जिला आबकारी अधिकारी को 70 हजार की रिश्वत लेते हुए रगे हाथों पकड़ा था। आरोप था कि अधिकारी ने शराब कारोबारी से कोई भी कार्रवाई नहीं करने की एवज मे रिश्वत ली थी। दूसरा मामला वर्ष 2023 में सीज ट्रेक्टर ट्रॉली अदला बदली घोटाले का हुआ। मामल यह था कि आबकारी विभाग में खड़े ट्रेक्टर ट्रॉली को सहायक आबकारी आयुक्त द्वारा माफिया से साठगांठ कर बदल दिया था और पुराना ट्रेक्टर खड़ा कर दिया। आरोप था कि इस अदला बदली में आरोपी को मोटी रकम भी दी गई थी। तीसरा मामला आठ सितंबर 2026 को हुआ। जब सचल दल में तैनात आबकारी दरोगा देवेंद्र कुमार, सिपाही बलजीत सिंह सहित सविदा कर्मियों ने एक कार को रोका और हिमाचल के शिमला कारोबारी के घर हुईं एक करोड़ कीमत का आधा किलो सोना और लाखों की नकदी महिला चोर से छीन लिया था और उसकी एवज में अभियुक्त को नेपाल भगाने का मौका दिया और छीना गया चोरी का माल आपस मे बाट लिया। खुलासा हुआ और शिमला पुलिस ने सभी की गिरफ्तारी कर डाली। यही वजह है कि पिछले तीन सालों से लगातार जिला आबकारी विभाग दागदार हो रही हैं। खाकी पर लग रहे रिश्वतकांड और भ्रष्टाचार के दाग को कैसे घोएगी। यह भविष्य के गर्त में है।
शासनादेश का होता है पालन
रुद्रपुर। जिला आबकारी अधिकारी महेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि प्रदेश सरकार का भी यही मकसद हैं कि राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है। आदेशानुसार सभी आबकारी कार्यलय में भ्रष्टाचार निवारण के अलावा शिकायती गोपनीय नंबर भी चस्पा किए गए है। शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और विभाग ने कार्रवाई भी की है।



